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Shrimad Bhagawadgita in Braj Bhasha


गीता भारतीय मनीषा के विविध आयामों की अमूल्य धरोहर है . यह जीवन दर्शन ही नहीं उत्कृष्ट कार्य एवं कर्तव्य निदान की अद्भुत निधि है . इसमें जीवन की सार्थकता उड़ेलने के सूत्र हैं . कहना न होगा कि जिसकी मनःस्थिति पाञ्चजन्य में मुरली और मुरली में पांचजन्य को समाहित करने की नही होगी वह गीता को आत्मसात नहीं कर सकता . गीता जीवन दर्शन है ,जिसके सनातन सत्य त्रिकालदर्शी हैं , कालातीत हैं.

नासतो विद्यते भावो , नाभावो विद्यते सतः ,जो अनित्य पदार्थ हैं , उनमें स्थायित्व नहीं हो सकता.
जो नित्य है वही सत्य है ,जो सत्य है उसका अनित्य से मेल नहीं हो सकता . गीता २ / १६
जिससे मेरा मरना न छूटे उसे लेकर क्या करूं ? हे वासुदेव ! शक्ति देना कि वैचारिक शरीर के प्रति सजग रहूँ . परमेश प्रभो को कोटि - कोटि नमन है जो अंतर्मन में समा कर मुझे भी अर्जुन की तरह गीता सुना गए . अनंत शक्ति को अनंत नमन
 

डॉ. मृदुल कीर्ति रचित ब्रजभाषा में श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।